नई दिल्ली। 8 फरवरी को दिल्ली के सुरजीत भवन में विपक्षी छात्र संगठनों के राष्ट्रीय नेतृत्व, शिक्षकों, सार्वजनिक बुद्धिजीवियों और सामाजिक आंदोलनों के नेताओं ने मिलकर ‘अखिल भारतीय फोरम फॉर इक्विटी’ का गठन किया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जितेंद्र मीना ने विश्वविद्यालयों में एससी, एसटी, और ओबीसी छात्रों पर हो रहे ऐतिहासिक उत्पीड़न को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि “सैकड़ों साथियों ने विश्वविद्यालयों में जातिगत उत्पीड़न के कारण अपनी जान गंवाई। उनके दर्द और ऐतिहासिक उत्पीड़न को देखते हुए यूजीसी ने भेदभाव विरोधी दिशानिर्देश जारी किए। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से एक अनावश्यक भय का माहौल बनाया गया और अंततः अदालत के जरिए इन दिशानिर्देशों पर रोक लगा दी गई।”
जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति ने मीडिया और ब्राह्मणवादी ताकतों द्वारा गढ़ी गई भ्रामक व मनगढ़ंत कहानी पर बात रखी। उन्होंने कहा कि “एक ऐसा कदम जो केवल न्यूनतम सकारात्मक कार्रवाई के लिए था उसे एक समुदाय के लिए खतरे के रूप में पेश किया गया। संभावित दुरुपयोग के नाम पर झूठ को बार-बार दोहराया गया और भय का माहौल बनाया गया।” अदिति ने रोहित एक्ट के आधार पर विश्वविद्यालयों में सामाजिक न्याय के दिशानिर्देशों को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि “इस संघर्ष में जेएनयूएसयू अग्रिम पंक्ति में रहेगा।”
डॉ लक्ष्मण यादव ने मंडल आंदोलन के दौर को याद करते हुए वर्तमान हालात से उसकी तुलना की। उन्होंने कहा कि “अदालतें लगातार सकारात्मक कार्रवाई को रोकने में भूमिका निभा रही हैं, जैसे कि एसआईआर जैसे मुद्दों पर चुप्पी साधना और ईडब्ल्यूएस आरक्षण को उसी उच्च न्यायालय द्वारा आसानी से मंजूरी मिल जाना।” उन्होंने मीडिया की पक्षपाती भूमिका की आलोचना करते हुए कहा कि “चंद मुट्ठी भर लोगों के यूजीसी विरोध को बड़ा आंदोलन दिखाया गया जबकि आज इलाहाबाद, पटना, दिल्ली सहित देश में कई जगह हजारों छात्र सड़कों पर हैं और मीडिया उन्हें नजरअंदाज कर रहा है।”

अखिल भारतीय दलित लेखिका मंच से डॉ हेमलता महेश्वर ने कहा कि “जाति उन्मूलन की परियोजना भारत के संवैधानिक प्रोजेक्ट की बुनियाद है और विश्वविद्यालयों को इसमें मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए।”
इस मंच के घटक संगठनों में शामिल हैं- डॉ जितेंद्र मीना, डॉ लक्ष्मण यादव, महेश चौधरी, भंवर मेघवंशी, जेएनयूएसयू, आइसा, एसएफआई, एनएसयूआई, एआईएसएफ, एमएसएफ, आरवाइए, डीएसएफ, एएसए, एआईओबीसीएसए, सीआरजेडी, कलेक्टिव, बापसा, सामाजिक न्याय आंदोलन बिहार, रिहाई मंच, सोशल जस्टिस आर्मी, एफटीआईआई छात्र संघ अध्यक्ष, ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति, गोंडवाना छात्र संगठन, भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा, जय आदिवासी युवा शक्ति एवं अन्य।
अन्य वक्ताओं में अरावली बचाओ जन-आंदोलन से महेश चौधरी, आइसा से नेहा, एसएफआई से सूरज एलामोन, एआईएसएफ से विराज, एनएसयूआई से अखिलेश कुमार, बापसा से क्रांति कुमार, जेएनयूएसयू सचिव सुनील यादव, डीएसएफ से हार्दिक, कलेक्टिव से प्रियम, एमएसएफ से अहमद साजू, एयूडीएससी से शरण्या, ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति से राजेंद्र सहित कई अन्य लोग शामिल रहे।

फोरम ने जेएनयूएसयू के निलंबित पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष के साथ एकजुटता व्यक्त की और कैंपस लोकतंत्र पर हो रहे तानाशाही हमलों की निंदा की।
फोरम ने 13 फरवरी को यूजीसी विनियमों के लिए अखिल भारतीय विरोध का आह्वान किया है जिसके तहत देश के 100 से अधिक विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध सभाएं होंगी।
यूजीसी रेगुलेशंस समता आंदोलन’ यूजीसी रेगुलेशंस 2026 के लिए संघर्षरत देशव्यापी आंदोलन का साझा मंच है। ‘अखिल भारतीय फोरम फॉर इक्विटी’ रोहित वेमुला एक्ट के आधार पर मजबूत यूजीसी सामाजिक समता विनियमों की मांग करता है।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)